Make your life happy

लोगों को प्रायः एक दूसरे से शिकायत रहती ही है। 
People often complain to each other.

Because the poor way of thinking is not known.

You will see that people always keep condemning each other.

This person has this defect, he has this defect.

I have even heard that some people have formed clubs which are named,

Let's condemn the other.

That is to say, the people of the world continue to condemn others and remain unhappy with them.

Because they only see their faults and shortcomings.

Many people are waiting for such an opportunity that if there is any fault of others, then we blackmail them.

Due to this idea, the poor people remain unhappy all day, and cannot get out of the condemnation.

This also has an impact on their relationship.

When you see or see someone's faults, then it is natural for him that you will lose respect.

Love and goodwill will also decrease.

If you are looking for someone who does not have a single flaw, there is not a single deficiency.

So maybe you will not find such a person even for a thousand births.

Only God is such that there is no fault or deficiency.

You do not know God properly.

Can't relate to him.

You cannot reach there. Then who will you belong to?

With whom will you live together?

No person will find you like this and you will always be sad.

So this is the matter of intelligence,

Not to see the faults of other people.

And suddenly be seen,

Even then, ignore them.

How to do?

 Stay away from the person who has big defects.

In which there are common faults or deficiencies, ignore those faults and deficiencies.

And bear the small faults and shortcomings of such people.

Live happily together with them.

Make your life happy


Because you are not yourself without 100 percent defects or shortcomings.






https://bit.ly/2X8p3Ee लोगों को प्रायः एक दूसरे से शिकायत रहती ही है। 
क्योंकि ठीक तरह से सोचने का ढंग बेचारे जानते नहीं। 
आप देखेंगे कि लोग सदा एक दूसरे की निंदा ही करते रहते हैं। 
इस व्यक्ति में यह दोष है, उसमें यह दोष है। 
मैंने तो यहां तक सुना है, कि कुछ लोगों ने ऐसे क्लब भी बना लिए हैं, जिनका नाम रखा है, 
आओ दूसरे की निंदा करें। 
कहने का तात्पर्य है, कि संसार के लोग दूसरों की निंदा करते रहते हैं और उनसे दुखी रहते हैं। 
क्योंकि वे उनके दोष एवं कमियां ही देखते रहते हैं।
अनेक लोग तो ऐसे अवसर की प्रतीक्षा में रहते हैं कि दूसरों का कोई दोष दिखाई दे, तो हम उनको ब्लैकमेल करें। 
इस विचार के कारण वे बेचारे सारा दिन दुखी रहते हैं, और निंदा चुगली आदि से बाहर नहीं निकल पाते। 
इस बात का उनके संबंधों पर भी प्रभाव पड़ता है। 
जब आप किसी के दोष देखते हैं अथवा दिख जाते हैं, तो उसके प्रति स्वाभाविक है, कि आपकी श्रद्धा कम हो जाएगी। 
प्रेम एवं  सद्भावना भी कम हो जाएगी। 
यदि आप कोई ऐसा व्यक्ति ढूंढ रहे हैं कि जिस में एक भी दोष न हो, एक भी कमी न हो। 
तो शायद आपको हजार जन्मों तक भी ऐसा व्यक्ति नहीं मिलेगा। 
केवल ईश्वर ही ऐसा है, जिस में कोई दोष अथवा कमी न  हो। 
ईश्वर को आप ठीक से जानते नहीं। 
उससे संबंध बना नहीं पा रहे। 
वहां तक आप पहुंच नहीं पा रहे। तो फिर आप किस से संबंध रखेंगे? 
किसके साथ मिलकर जीएँगे?
कोई व्यक्ति आपको ऐसा नहीं मिलेगा और आप सदा दुखी ही रहेंगे।
इसलिए बुद्धिमत्ता की बात यही है, 
कि दूसरे लोगों के दोषों को न देखें। 
और अचानक दिख ही जाएं, 
तो भी उनकी उपेक्षा करें। 
कैसे करें?
 जिस में बड़े-बड़े दोष हों, उस व्यक्ति से दूर रहें। 
जिस में सामान्य दोष या कमियां हों, उन दोषों व कमियों की उपेक्षा करें। 
और ऐसे लोगों के छोटे छोटे दोषों तथा कमियों को सहन करें। 
उनके साथ मिल जुलकर आनन्द से रहें। 
अपने जीवन को सुखी बनाएं। 
क्योंकि 100 प्रतिशत दोषों या कमियों से रहित आप स्वयं भी तो नहीं हैं।



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